Month: August 2025
तुम बचे रहो प्रेम
सहसा एक फूल गिरा कई रंग गिरे डाल से नए रंग उगे आसमान सफेद बादलों से घिरा नन्हीं चिड़िया फूलों का रस ले उड़ी अगर तुम खोलोगे इस खिड़की को तो देख पाओगे बाहर जो घटित हो रहा है जैसे जीवन हर पल कुछ कहता है मैं प्रकृति को सुनती हूं अक्सर मेरी उदास शाम … Read more
किस्मत इन्हें कैमरे के सामने खींच लाई
“बरखुरदार तुम तो पैदाईशी एक्टर हो। फिल्मों में एक्टिंग करो। मैं तुम्हारी ज़िंदगी बना दूंगा। छोड़ो ये फोटोग्राफी।” मोहन सिन्हा ने ये बात जीवन साहब से कही थी। और ये बहुत साल पहले की बात है। चलिए आज जीवन साहब और उनके आइकॉनिक “नारद मुनि” के किरदार के बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं। … Read more
आध रुपए की किताब मोल लेकर उस पर लेखक के दस्तखत लेना
मिर्जा साहब मेरी प्रतीक्षा में थे। मेरे जाते ही खाना परोसा गया। मिर्ज़ा साहब के लिए इतना कम और सादा कि जैसे बुलबुल के आँसू और मेरे लिए ढेर सारा और नाना प्रकार का। खाने के बाद पीरो मुर्शिद ने आँगन में धूप से कुछ हटकर अपना पलंग बिछवाया, मेरे लिए एक छोटी सी चौकी … Read more
सोशल मीडिया पर क्यों लिखना चाहिए?
कुछ लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लिखने का क्या फायदा। मेरा अपना अनुभव रहा है… इस सोशल मीडिया से पता चला कि दूरदराज में बैठे लोग भी कितना अच्छा लिख रहे हैं। कितनों को इसकी वजह से किताब छपवाने का अवसर मिला। जैसे शैलजा पाठक बहुत अच्छा लिखती हैं, हम सब उनके … Read more
वर्तिका की नई किताब : जेलों में इंद्रधनुष बनाने की कोशिश
रामधनी द्विवेदीजब मैं बरेली में दैनिक जागरण का संपादकीय प्रभारी था, मेरे क्राइम रिपोर्टर सीपी सिंह ने एक दिन मुझसे कहा ‘ सर चलिए आपको एक नई जगह ले चलते हैं।‘ मैने पूछा भी कि कहां तो उसने नहीं बताया। मैं उसकी मोटरसाइकिल पर ही बैठ गया और थोड़ी देर में उसने बरेली सेंट्रल जेल … Read more