हमारे बारे में
मेरा रंग फाउंडेशन एक सामाजिक संस्था है जो समाज में जेंडर अवेयरनेस और वैचारिक संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए काम करती है। हमारा उद्देश्य है कि लोग स्त्री-पुरुष समानता को केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन का व्यावहारिक हिस्सा समझें। संस्था लगातार ऐसे संवाद, कार्यशालाएँ और कार्यक्रम करती है जिनसे जेंडर के मुद्दों पर बात खुले और रचनात्मक ढंग से हो सके।

‘मेरा रंग’ : क्योंकि हर आवाज़ मायने रखती है
संस्था ने 2018 से दिल्ली, गोरखपुर, लखनऊ और नोएडा में नियमित रूप से आयोजन किए हैं, जिनके माध्यम से समाज में लैंगिक समानता और महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर संवाद को निरंतरता दी गई है। दिल्ली में ‘मी टू: स्त्री समाज और कानून’ (2018), ‘आज की स्त्री और कविता’ (2018), ‘राजनीति और महिलाएं’ (2019), ‘महिला उद्यमिता: सफलता की उड़ान’ (2021), ‘सोशल मीडिया और स्त्रीवाद’ (2022), ‘समकालीन स्त्री लेखन का युवा तेवर’ (2022), ‘समाज में भाषा और जेंडर’ (2023), ‘महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा और मीडिया की भूमिका’ (2024) और ‘जब स्त्री बोलती है’ (2025) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से संस्था ने शिक्षा, मीडिया, साहित्य और नीति के स्तर पर स्त्री के प्रश्नों को रेखांकित किया है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में संस्था की सक्रिय उपस्थिति गोरखपुर केंद्र के माध्यम से रही है, जहाँ ‘घरेलू हिंसा: महिलाओं के कानूनी अधिकार’ (2019), ‘महामारी के दौर में मानसिक सेहत’ (2021), ‘एसिड अटैक: जागरूकता और फाइटर्स की कहानियां’ (2023), ‘राजनीति में महिलाएं: चुनौतियां और अवसर’ (2023), ‘पूर्वांचल में फेमिनिज़्म’ (2024) जैसे आयोजन किए गए, और नवंबर 2025 में आयोजित आगामी कार्यक्रम ‘पूर्वांचल का सामाजिक-आर्थिक ढांचा और स्त्री की बदलती भूमिका’ इसी क्रम को आगे बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त नोएडा में ‘जेंडर की पाठशाला’ (2025) तथा लखनऊ में ‘स्त्रियों के संवैधानिक अधिकार और राज्य की भूमिका’ (2025) जैसे कार्यक्रमों से संस्था का शैक्षिक और नीतिगत विमर्श मजबूत हुआ है।

हम क्या करते हैं?
डिजिटल मीडिया के माध्यम से संवाद : फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वेबसाइट के ज़रिए हम उन विषयों को उजागर करते हैं जो समाज में लिंग आधारित भेदभाव, रूढ़ियों और टैबू से जुड़े होते हैं। हम वीडियो, लेख, इंटरव्यू, कहानियों और पॉडकास्ट जैसी शैलियों का उपयोग करते हैं ताकि संवाद जीवंत और व्यापक बन सके।
जमीनी स्तर पर सक्रियता : ‘मेरा रंग’ सिर्फ एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं है, यह एक चिंतनशील आंदोलन भी है। हम समय-समय पर कार्यशालाएं, सार्वजनिक संवाद, अभियान और इवेंट्स का आयोजन करते हैं, जहाँ समुदायों को जोड़ने और विचारों के आदान-प्रदान का मौका मिलता है।
आवाज़ों को मंच देना : यह मंच उन महिलाओं के लिए है जो अपनी कहानियों, कविताओं, चित्रों, वीडियो या किसी भी रूप में अपने विचारों को साझा करना चाहती हैं। हम उनका सम्मानपूर्वक मंचन करते हैं ताकि उनकी पहचान को समाज में उचित स्थान मिल सके।

ज़मीनी सक्रियता
संस्था केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू हिंसा के मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप भी करती है। पूरे वर्ष संस्था कानूनी विशेषज्ञों के साथ मिलकर घरेलू हिंसा से जुड़े कई मामलों में सहायता करती रही है। इसमें सबसे अहम 2024 में गाज़ियाबाद में एक घरेलू सहायिका के साथ हुई हिंसा और बंधक बनाए जाने की घटना में संस्था का हस्तक्षेप था। मेरा रंग ने उसके रेस्क्यू और कानूनी सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे अमर उजाला, पत्रिका, बीबीसी, टाइम्स ऑफ इंडिया तथा द मूकनायक समेत कई अखबारों ने प्रकाशित किया।
संस्था समानांतर रूप से ज़मीनी स्तर पर भी सक्रिय है। ‘मेरी रात मेरी सड़क’ जैसे अभियानों में भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर स्त्रियों की उपस्थिति के अधिकार को बल दिया गया, जबकि गोरखपुर में ‘रंग सार्थक’ परियोजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं द्वारा थैले तैयार कराए जाते हैं, जिससे स्वावलंबन और पर्यावरण दोनों को प्रोत्साहन मिले। इस तरह, मेरा रंग फाउंडेशन हर वर्ष अपने कार्य के माध्यम से समाज में जेंडर समानता और संवेदनशीलता के स्थायी परिवर्तनों की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

हमारे साथ कैसे जुड़ें?
हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ लिंग कोई अवरोध नहीं, बल्कि विविधता की पहचान हो। हम चाहते हैं कि हर लड़की और हर महिला अपने अधिकारों, सपनों और फैसलों को लेकर आत्मनिर्भर, मुखर और स्वाभिमानी हो।
आप “मेरा रंग” की यात्रा में भागीदार बन सकते हैं:
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