साहित्य

Decision to Leave : एक प्रेम कहानी जो मर्डर मिस्ट्री भी है

सुषमा गुप्ता

The moment you said you loved me,
Your love ended.
And the moment your love ended,
My love began.

यह डॉयलॉग है कोरियन फिल्म Decision to Leave से। आप इन पंक्तियों की डेप्थ समझ पा रहे हैं! यह पंक्तियाँ फिल्म में जिस मोड़ पर आती है आप स्तब्ध रह जाते हैं।

प्यार आपको किस हद तक पागल कर सकता है, किस हद तक के सामने दिखती चीज़ें अपना वजूद खोने लगती है, इस हद तक कि नज़र का भ्रम, नज़र से ज़्यादा सच हो जाता है। इतना ज़्यादा कि हकीकत का सामना हो जाने के बाद भी उसे पूरी तरह अपना नहीं पाता। एक ‘शायद’ कांटे की तरह सीने में गढ़ जाता है।

सुनते आए हैं कि दुनिया को बस प्रेम बचा सकता है पर क्या इस बात से भी इनकार किया जा सकता है कि प्रेम के बहुत सारे रूप है! उनमें से एक प्रेम जुनून भरा अपराधिक ऑब्सेशन जानलेवा भी होता है। अब कहने को तो कह सकते हैं कि यह कोई प्रेम थोड़ी हुआ, पर आप और हम जज करने वाले होते कौन हैं!

फिल्म की कहानी एक ब्रिलिएंट और इंसोमेनिक (उसे नींद नहीं आती वह पूरी-पूरी रात काम करता है और अक्सर इस वजह से खोया चुपचाप उदास रहता है), पुलिस ऑफिसर के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक पहाड़ से गिरकर मरे हुए आदमी के केस की जांच कर रहा है। जांच के दौरान उस आदमी की पत्नी जो लगभग उसकी आधी उम्र की है, वह प्राइम सस्पेक्ट है। लेकिन जैसे-जैसे वह पुलिस ऑफिसर उसके साथ समय बीतता है उसके भीतर उसे स्त्री को लेकर भावनाएँ बदलने लगती हैं। यही कहानी का रोमांटिक थ्रिलर कांबिनेशन है पर आगे बहुत कुछ है जो देखने वालों को भी सोच में डाल देगा।

बहुत से सबूत साबित कर रहे हैं कि यह काम उसी लड़की ने किया है लेकिन उन्हें जब लड़की ने अपने नज़रिए से दिखाया तो इंस्पेक्टर ने मान लिया यह उसने नहीं किया है। वह दोनों एक दूसरे के नज़दीक आए और फिर जो प्रेम की नियति मानी जाती है, टूट हारकर दूर हो गए।

दूर होने के बाद साल बीत जाता है वह लड़की फिर से सस्पेक्ट है फिर से अपने पति के मर्डर के चार्ज में। यह उसका दूसरा पति है और इस बार वह लड़का जो इंस्पेक्टर है हर मुमकिन कोशिश कर रहा है लड़की को फ्रेम करने की पर उसके खिलाफ़ इस बार कोई पुख़्ता सबूत ही नहीं है।

पर आखिर दोनों मर्डर किए किसने और क्यों, ये बहुत दिलचस्प है। फिल्म का अंत दिल तोड़ता है पर दुनिया में प्रेम करने वालों के दिल बचते भी कहाँ हैं! अंत में उन्हें टूटना ही है।

डिसीज़न टू लीव, शानदार सस्पेंस थ्रिलर है जिसकी अंडरटोन में एक ऐसा प्रेम है जो क्रीपिंग है, जो बेबस है और जो …

इस ‘जो’ के बाद के फिल इन द ब्लैंक्स आप फिल्म देख कर खुद भर लीजिएगा।

मुझे कोरियन फिल्में पसंद है। किम कि डुक की फिल्में पहले नंबर पर आती हैं। वोंग कार वाई की दूसरे और उसके बाद कुछ और डायरेक्टर्स भी है जिनका काम आला दर्जे का है। इन्हीं में से एक हैं पार्क चान-वुक। इस फिल्म को इन्होंने लिखा भी है, प्रोड्यूस भी किया है और डायरेक्टर भी यहीं हैं। कैमरे पर इनकी पकड़ कमाल है। इनकी कहानियों के पात्र लेयर्ड और डार्क शेड्स लिए होते हैं। इनकी OldBoy और The Handmaiden फिल्मों से शायद ही कोई सिनेमा प्रेमी हो जो परिचित ना हो। Handmaiden तो इस लेवल की क्रीपिंग है कि दिमाग से उतरती ही नहीं।

Decision to Leave पूरी तरह से अपने शीर्षक को जस्टिफाई भी करती है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत subtle है, जो सस्पेंस को धीरे-धीरे बढ़ाता है। नायक नायिका के बीच में एक तनाव झूलता रहता है जिसे बैकग्राउंड स्कोर बहुत शानदार तरीके से हाईलाइट करता है। पार्क चान-वुक का निर्देशन इतना कमाल है कि बहुत जगह साइलेंस भी पावरफुल है। बेहतरीन फोटोग्राफी, शानदार अभिनय और एक अलग सी प्रेम कहानी, जो मर्डर मिस्ट्री भी है, इस फिल्म को यूनिक बनाता है।

कान फिल्म फेस्टिवल 2022 में पार्क चान-वुक को इसके लिए बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला है। 2023 में बाफ्टा अवार्ड मिला है बेस्ट फिल्म का। बहुत से अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में डिसीजन टू लीव ने अनेक पुरस्कार जीते हैं।

सस्पेंस और रोमांस का अनोखा मिश्रण देखना चाहते हैं जो आपको बांधे रखे तो यह फिल्म एक अच्छा ऑप्शन है।

गुप्ता समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय लेखिका हैं, जो कहानी, उपन्यास और कविता के माध्यम से मानवीय संबंधों, मध्यवर्गीय जीवन और स्त्री अनुभवों की सूक्ष्म परतों को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में तुम्हारी पीठ पर लिखा मेरा नाम, मन विचित्र बुद्धि चरित्र, कितराह और तलब उल्लेखनीय हैं, जिनका प्रकाशन हिंद युग्म से हुआ है। उनकी रचनाओं में जीवन के साधारण अनुभवों को संवेदनशील और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत करने की विशेषता दिखाई देती है, जिसके कारण उनका लेखन पाठकों से गहरा संवाद स्थापित करता है।

सुषमा गुप्ता समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय लेखिका हैं, जो कहानी, उपन्यास और कविता के माध्यम से मानवीय संबंधों, मध्यवर्गीय जीवन और स्त्री अनुभवों की सूक्ष्म परतों को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में तुम्हारी पीठ पर लिखा मेरा नाम, मन विचित्र बुद्धि चरित्र, कितराह और तलब उल्लेखनीय हैं, जिनका प्रकाशन हिंद युग्म से हुआ है। उनकी रचनाओं में जीवन के साधारण अनुभवों को संवेदनशील और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत करने की विशेषता दिखाई देती है, जिसके कारण उनका लेखन पाठकों से गहरा संवाद स्थापित करता है।
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