• देश को चाहिए एक सुविचारित सांस्कृतिक नीति : कमलिनी दत्त से रमेश उपाध्याय की बातचीत

    देश को चाहिए एक सुविचारित सांस्कृतिक नीति : कमलिनी दत्त से रमेश उपाध्याय की बातचीत

    कमलिनी नागराजन दत्त को मैं दूरदर्शन के केंद्र निर्माण केंद्र की निदेशक के रूप में कम और अपने कवि मित्र श्री कुबेर दत्त की पत्नी के रूप में अधिक जानता हूँ। वे तमिलभाषी हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा हिंदीभाषी उत्तर भारतीय कुबेर दत्त…


  • महादेवी की रचना ‘अतीत के चलचित्र’ में व्यक्त स्त्री-जीवन

    महादेवी की रचना ‘अतीत के चलचित्र’ में व्यक्त स्त्री-जीवन

    कविता मल्होत्रा : हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार, स्वाधीनता सेनानी और शिक्षाविद् भी रहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपने कविता लेखन से समृद्ध तो किया ही है, जिसके कारण उनकी गणना छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में होती है, साथ ही…


  • ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

    ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

    चैताली सिन्हा : हिन्दी नवजागरण की महत्वपूर्ण लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सशक्त वक्ता, संपादिका, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक कृतियों से मानवीय दृष्टिकोण को प्रज्वलित करनेवाली चित्रकार महादेवी वर्मा की यह पुस्तक ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ आधुनिक स्त्री-अस्मिता को अभिव्यक्त करने में मील का पत्थर सिद्ध हुई है। विरह और वेदना की रहस्यमयी कविताएँ लिखने वाली महादेवी ने…


  • देश को चाहिए एक सुविचारित सांस्कृतिक नीति : कमलिनी दत्त से रमेश उपाध्याय की बातचीत

    देश को चाहिए एक सुविचारित सांस्कृतिक नीति : कमलिनी दत्त से रमेश उपाध्याय की बातचीत

    कमलिनी नागराजन दत्त को मैं दूरदर्शन के केंद्र निर्माण केंद्र की निदेशक के रूप में कम और अपने कवि मित्र श्री कुबेर दत्त की पत्नी के रूप में अधिक जानता हूँ। वे तमिलभाषी हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा हिंदीभाषी उत्तर भारतीय कुबेर दत्त…


  • महादेवी की रचना ‘अतीत के चलचित्र’ में व्यक्त स्त्री-जीवन

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    कविता मल्होत्रा : हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार, स्वाधीनता सेनानी और शिक्षाविद् भी रहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपने कविता लेखन से समृद्ध तो किया ही है, जिसके कारण उनकी गणना छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में होती है, साथ ही…


  • ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

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    चैताली सिन्हा : हिन्दी नवजागरण की महत्वपूर्ण लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सशक्त वक्ता, संपादिका, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक कृतियों से मानवीय दृष्टिकोण को प्रज्वलित करनेवाली चित्रकार महादेवी वर्मा की यह पुस्तक ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ आधुनिक स्त्री-अस्मिता को अभिव्यक्त करने में मील का पत्थर सिद्ध हुई है। विरह और वेदना की रहस्यमयी कविताएँ लिखने वाली महादेवी ने…


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  • ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

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    कमलिनी नागराजन दत्त को मैं दूरदर्शन के केंद्र निर्माण केंद्र की निदेशक के रूप में कम और अपने कवि मित्र श्री कुबेर दत्त की पत्नी के रूप में अधिक जानता हूँ। वे तमिलभाषी हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा हिंदीभाषी उत्तर भारतीय कुबेर दत्त…

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    कविता मल्होत्रा : हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार, स्वाधीनता सेनानी और शिक्षाविद् भी रहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपने कविता लेखन से समृद्ध तो किया ही है, जिसके कारण उनकी गणना छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में होती है, साथ ही…

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    कमलिनी नागराजन दत्त को मैं दूरदर्शन के केंद्र निर्माण केंद्र की निदेशक के रूप में कम और अपने कवि मित्र श्री कुबेर दत्त की पत्नी के रूप में अधिक जानता हूँ। वे तमिलभाषी हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा हिंदीभाषी उत्तर भारतीय कुबेर दत्त…

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    कविता मल्होत्रा : हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार, स्वाधीनता सेनानी और शिक्षाविद् भी रहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपने कविता लेखन से समृद्ध तो किया ही है, जिसके कारण उनकी गणना छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में होती है, साथ ही…

  • ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

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    कमलिनी नागराजन दत्त को मैं दूरदर्शन के केंद्र निर्माण केंद्र की निदेशक के रूप में कम और अपने कवि मित्र श्री कुबेर दत्त की पत्नी के रूप में अधिक जानता हूँ। वे तमिलभाषी हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा हिंदीभाषी उत्तर भारतीय कुबेर दत्त…

  • महादेवी की रचना ‘अतीत के चलचित्र’ में व्यक्त स्त्री-जीवन

    कविता मल्होत्रा : हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार, स्वाधीनता सेनानी और शिक्षाविद् भी रहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपने कविता लेखन से समृद्ध तो किया ही है, जिसके कारण उनकी गणना छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में होती है, साथ ही…

  • ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ के गर्भ में स्त्री-चेतना

    चैताली सिन्हा : हिन्दी नवजागरण की महत्वपूर्ण लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सशक्त वक्ता, संपादिका, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक कृतियों से मानवीय दृष्टिकोण को प्रज्वलित करनेवाली चित्रकार महादेवी वर्मा की यह पुस्तक ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ आधुनिक स्त्री-अस्मिता को अभिव्यक्त करने में मील का पत्थर सिद्ध हुई है। विरह और वेदना की रहस्यमयी कविताएँ लिखने वाली महादेवी ने…

  • महादेवी वर्मा की रचनात्मकता एवं हिंदी नवजागरण की भाव-भूमि

    अभिषेक सौरभ : आधुनिक हिंदी कविता में छायावाद अपनी विशेष काव्यात्मक समृद्धि, दार्शनिक गंभीरता, शिल्पगत नवीनता, स्वाधीनता की चेतना, सौन्दर्य चित्रण एवं मानवीय उर्जाप्रद संवेदनशीलता के लिए उल्लेखनीय है। सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद एवं सुमित्रानंदन पंत जैसे कवियों के साथ, आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हुईं महादेवी वर्मा कवयित्री के बतौर छायावाद के आधार…

  • महादेवी वर्मा का संस्मरण-शिल्प

    कविता मलहोत्रा : हिंदी साहित्य में संस्मरण विधा का जन्म भारतेंदु युग में हुआ। अपने जन्मकाल में यह गौण विधा रही। हिंदी के आरंभिक संस्मरण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। हिंदी संस्मरण विधा का पल्लवन ‘सरस्वती’ पत्रिका के माध्यम से हुआ। इनके अतिरिक्त ‘विशाल भारत’, ‘माधुरी’, ‘चांद’, ‘हंस’, ‘युवक’, ‘वीणा’ आदि पत्रिकाओं में संस्मरण प्रकाशित होने…

  • जीव-जंतुओं के प्रति करुणा जगाती महादेवी वर्मा की रचना ‘मेरा परिवार’

    डॉ. चित्रा : आधुनिक युग की प्रमुख कवयित्री के रूप में महादेवी वर्मा का नाम प्रख्यात हैं। अपनी काव्यात्मक प्रतिभा, और दार्शनिक गम्भीरता के लिए आधुनिक हिन्दी कविता में महादेवी वर्मा का नाम उल्लेखनीय है । महादेवी वर्मा छायावाद की एक प्रख्यात कवयित्री हैं । महादेवी वर्मा और छायावाद दो ऐसे नाम है जिन्हें एक-…