लिखना अपना खालीपन भरना है : विनोद कुमार शुक्ल

Vinod Kumar Shukla

लेखक विनोद कुमार शुक्ल से संगम पांडेय की यह बातचीत करीब 25 साल पहले जनसत्ता में प्रकाशित हुई थी। इस बातचीत में एक किस्म का अखबारी तेवर और तात्कालिकता भी है, जिन पर दिए गए जवाबों से हमें शायद विनोद कुमार के लेखन और शख़्सियत को समझने के कुछ और सूत्र मिलें। प्रस्तुत है पूरी … Read more