सिनेमा

The Vanishing (1988) : प्यार, जुनून और डर की सिहरन पैदा करती कहानी

सुषमा गुप्ता :

यह एक डच फिल्म है जो स्पूरलूस (द वैनिशिंग) के नाम से 1988 में आई थी। यह टिम क्रैबे के ‘गोल्डन एग’ नाम के नोवल पर बेस्ड है।

अगर आप साइको ड्रामा थ्रिलर देखना पसंद करते हैं तो यह मूवी आपके लिए है। अपने स्लो स्टडी पेस पर चलती हुई अंत तक आते-आते बोन चिलिंग हो जाती है, मतलब एक ऐसी मिस्ट्री जो आपको बेहद बेचैन कर देगी कि आखिर अब क्या होने वाला है। एक लड़का है रेक्स, जो अपनी गर्लफ्रेंड सास्किया के साथ फ्रांस जा रहा है, कार के ऊपर दो बाइसिकल रखे, बाइकिंग के लिए। रास्ते में पेट्रोल खत्म हो जाता है एक टनल में, जहाँ अंधेरा है। उसकी गर्लफ्रेंड डरी हुई है। वह उसे बताती है कि उसने एक बहुत बुरा सपना देखा कि आकाश में वह कहीं दो सुनहरे अंडों में कैद हैं और एक टकराव हो जाने की वजह से एक-दूसरे से दूर जा रहे हैं। वह उसके इस तरह के सपने पर उसे डांट देता है और उसके मना करने के बावजूद उसको उस टनल में अकेला छोड़कर पेट्रोल लेने चला जाता है। जब वह लौटकर आता है तब वह कार में नहीं होती। अब वह परेशान हो उठता है, पर टनल के छोर पर वह उसे मिल जाती है और तब उसे अहसास होता है कि वह हक़ीक़त में उसको बहुत ज़्यादा प्यार करता है, उससे कहीं ज़्यादा जितना वह समझता था।

पर अब रेक्स के इस तरह जाने से सास्किया डर चुकी है कि जब वह आज अचानक इस तरह छोड़ सकता है तो आगे भी, कभी भी अकेला छोड़ सकता है। बाद में दोनों की प्यार भरी लड़ाई होती है। वह उससे कसम लेती है कि रेक्स उसे अब कभी छोड़कर नहीं जाएगा और दोनों अपने प्यार की निशानी की तरह दो सिक्के वहाँ पेड़ के नीचे दबाते हैं। फिर वह उसे कहती है कि अब हाईवे पर गाड़ी वह चलाएगी। रेक्स खुशी-खुशी चाबी उसे दे देता है। सास्किया बोलती है कि मैं कुछ पीने को ले आती हूँ, फिर यहाँ से चलते हैं। वहाँ रोडसाइड एक दुकान है, डिपार्टमेंटल स्टोर, जिस पर बहुत भीड़ भी है। वह वहाँ से कोक और बियर खरीदने जाती है। रेक्स कार के पास इंतज़ार करता है और सदा के लिए इंतज़ार करता ही रह जाता है। वह लौटकर नहीं आती।

फिल्म तीन साल की लीप लेती है। दीवारों पर पोस्टर हैं सास्किया की गुमशुदगी के। रेक्स उसे अभी भी ढूंढ़ रहा है। फिल्म में साथ-साथ एक और आदमी की कहानी भी चल रही है जिसका नाम रेयमंड है, जो केमिस्ट्री का अध्यापक है। यह भी दिखाया जाता है कि वह अपने एक हाथ पर नकली प्लास्टर लगाकर, अपना हाथ टूटा हुआ दिखाकर लड़कियों को बरगलाने की कोशिश कर रहा है कि वह किसी तरह उसकी गाड़ी में उसके साथ बैठने को तैयार हो जाएँ, जिसमें उसको सफलता नहीं मिल पा रही और वह फ्रस्ट्रेट होता जा रहा है। इस फ्रस्ट्रेशन में वह अपनी डायरी में बार-बार अपना ऊपर-नीचे होता हुआ पल्स रेट भी नोट कर रहा है। वह क्लोरोफॉर्म के साथ भी कुछ एक्सपेरिमेंट करता दिखाया जाता है। फिल्म में रेयमंड का एक प्यारा सा परिवार भी दिखाया गया है, पत्नी है, दो बेटियाँ हैं। कुल मिलाकर वह एक अच्छा पारिवारिक इंसान है। एक बार वह पानी में डूबती अनजान बच्ची को बचाने के लिए एक पल नहीं लगाता और पानी में कूद जाता है, तब उसकी बेटी कहती है कि आप तो हीरो हैं।

तीन साल बीत चुके हैं। रेक्स अपनी गर्लफ्रेंड को बिल्कुल नहीं भुला पा रहा है। उसको बुरे सपने आते हैं, जो दिन-प्रतिदिन अजीब होते जा रहे हैं। वह उसको खोजने में और उसी पागलपन में डूबा रहता है। उसके पास अलग-अलग पोस्टकार्ड भी आते हैं, जिनमें कोई दावा करता है और कहीं मिलने के लिए बुलाता है कि तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में मुझे पता है। वह हर उस जगह पहुँचता है जहाँ उसे बुलाया जाता है और इंतज़ार करता रहता है, पर कोई नहीं आता। उसकी प्रेजेंट गर्लफ्रेंड भी उसका साथ देने की कोशिश करती है, पर उसके इस बढ़ते पागलपन के आगे उसका नया रिलेशनशिप भी सर्वाइव नहीं कर पाता और वह लड़की उसे छोड़कर चली जाती है। इसके बाद रेक्स टीवी पर आता है और एक पब्लिक अपील करता है कि जिसने भी उसकी गर्लफ्रेंड को अगवा किया है या उसके साथ जो भी किया है, वह उससे नफ़रत नहीं करता, पर वह कम से कम उसको यह तो बता दे कि उसने सास्किया के साथ किया क्या है।

कुछ दिन बाद रेयमंड उससे मिलने आता है और उसको बताता है कि तुम जिस आदमी को ढूंढ़ रहे हो वह मैं हूँ। रेक्स आवेश में आकर उस पर हाथ उठाता है, फिर रेयमंड की बातों से समझ जाता है कि उसे धैर्य रखना होगा यह जानने के लिए कि सास्किया के साथ क्या हुआ है, वरना उसे कभी कुछ पता नहीं चल पाएगा। रेयमंड कहता है कि मेरे साथ तुमको फ्रांस चलना होगा जैसे तुम अपनी गर्लफ्रेंड के साथ जा रहे थे। सब कुछ वही दोहराएँगे, तब मैं तुम्हें बताऊँगा उसके साथ क्या हुआ। पहले रेक्स मना कर देता है तो रेयमंड कहता है यही एक तरीका है उसके बारे में जानने का, वरना मैं तुम्हें कुछ भी नहीं बताऊँगा और तुम्हारे पास मेरे खिलाफ कोई भी सबूत नहीं है, इसलिए तुम पुलिस में जाकर भी कुछ साबित नहीं कर पाओगे। अब चूँकि रेक्स के पास कोई विकल्प नहीं होता तो वह हताश होकर उसके साथ जाने को तैयार हो जाता है।

रेक्स इन तीन सालों में लगभग पागलपन की हद तक पहुँच चुका है। यह जानने के लिए कि आखिर सास्किया का हुआ क्या। रास्ते भर रेयमंड उसे इरिटेट करता है, उसे बताता है कि वह किस तरीके का साइकोपैथ है कि एक बार 16 की उम्र में वह बालकनी में चढ़ गया और सोच रहा था कि नीचे कूद जाऊँ। फिर उसने सोचा, सोचते तो बहुत लोग हैं पर सच में ऐसा कोई करता नहीं है। अब क्योंकि कोई ऐसा करता नहीं है और यही माना जाता है कि वह ऐसा करेगा भी नहीं, तो उसको यह करना ही है और बालकनी से कूद जाता है, जिससे उसके हाथ-पैर भी टूट जाते हैं। इसी तरीके से वह बताता है कि जब मेरी बेटी ने मुझे हीरो ब्रांड किया तो मुझे कुछ ऐसा करना था जो एक्सट्रीम बुरा काम हो।

रेक्स फिर पूछता है क्या तुमने सास्किया का रेप किया या उसका मर्डर? रेयमंड बोलता है यह सब मेरे लिए कोई ऐसा नीच काम नहीं है, मुझे उससे भी बुरा कुछ करना था। रेक्स बिल्कुल पागल जैसा होता जा रहा था, बार-बार पूछ रहा था तुमने उसका क्या किया, पर रेयमंड नहीं बताता। सफर खत्म होते-होते रात हो जाती है। अब वह वहीं है जहाँ पर सास्किया गायब हुई थी। रेयमंड कार वहाँ खड़ी करता है, एक फ्लास्क निकालकर एक गिलास में उसको कॉफी डालकर देता है और कहता है इसको पी लो, तभी जान पाओगे कि उसके साथ क्या हुआ। रेक्स पूछता है तुमने इसमें क्या मिलाया, तो वह बोलता है नींद की गोलियाँ। रेक्स चिल्लाता है कि तुम सीधा-सीधा बताते क्यों नहीं कि तुमने किया क्या। रेयमंड फिर कहता है अगर जानना है कि उसके साथ क्या हुआ तो यही एक तरीका है। रेक्स कहता है जैसे तुमने उसको कॉफी देकर मार दिया, ऐसे तो मुझे भी मार दोगे। रेयमंड टस से मस नहीं होता।

रेक्स असमंजस में है, करूँ तो क्या करूँ। बौखलाहट और पागलपन की हालत में वह उस पेड़ तक जाता है जहाँ उसने सास्किया के साथ सिक्के दबाए थे, कसम खाकर कि वह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। वह तीन साल बाद भी वहीं होते हैं। वह बेबसी से चीखता-चिल्लाता है और आकर फिर एक झटके में उसकी दी हुई कॉफी पी लेता है, जिसमें उसने कुछ मिलाया होता है।

अब आगे क्या होता है यह मैं नहीं बताऊँगी, इसके लिए तो फिल्म देखनी पड़ेगी।

पर यह वाकई एक ऐसी फिल्म है जिसमें कोई ओवर द टॉप डायलॉग नहीं है, कोई हाई पिच क्रिएट किए हुए सीन नहीं हैं, पर उसके बावजूद फिल्म ऐसी है जो आपको अंत आते-आते एक गहरे सन्नाटे में डाल देगी।

यह कहानी जितनी रेक्स के जुनूनी खोज की है, उतनी ही रेयमंड के विचित्र कैरेक्टर की भी है। जिसको सीधा-सीधा पागलपन में तो बिल्कुल नहीं डाला जा सकता, यह कुछ अलग वायरिंग थी। इंसान के भीतर-भीतर पलते विचित्र और ख़तरनाक किरदारों की परतों का एक विलक्षण चित्रण है इसमें। इस मूवी को अब तक की ग्रेटेस्ट थ्रिलर फिल्मों में भी गिना जाता है। समय और मन हो तो देखिएगा।

इस फ़िल्म को डायरेक्ट किया है जॉर्ज स्लुइज़र ने और लीड रोल में हैं बर्नार्ड-पियरे डोनाडियू (रेमंड लेमोर्न), जीन बर्वोएट्स (रेक्स हॉफमैन), और जोहाना टेर स्टीज (सास्किया वैगटर)।

इस फिल्म को Golden Calf Awards (नीदरलैंड्स का नेशनल फिल्म अवॉर्ड) में Best Film का सम्मान मिला था। Sitges Film Festival (स्पेन) में भी इसे अवॉर्ड मिला। यह फेस्टिवल खासतौर पर थ्रिलर/हॉरर जॉनर के लिए ही जाना जाता है। यूरोपियन फ़िल्म अवॉर्ड्स में इसे बेस्ट फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था। कई अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में यह क्रिटिकली अक्लेम्ड रही और धीरे-धीरे कल्ट स्टेटस हासिल किया।

इस फ़िल्म को “most unsettling psychological thrillers” में से एक गिना जाता है।

सुषमा गुप्ता समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय लेखिका हैं, जो कहानी, उपन्यास और कविता के माध्यम से मानवीय संबंधों, मध्यवर्गीय जीवन और स्त्री अनुभवों की सूक्ष्म परतों को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में तुम्हारी पीठ पर लिखा मेरा नाम, मन विचित्र बुद्धि चरित्र, कितराह और तलब उल्लेखनीय हैं, जिनका प्रकाशन हिंद युग्म से हुआ है। उनकी रचनाओं में जीवन के साधारण अनुभवों को संवेदनशील और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत करने की विशेषता दिखाई देती है, जिसके कारण उनका लेखन पाठकों से गहरा संवाद स्थापित करता है।
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