सिनेमा

जॉयलैंड: प्रेम, पहचान और घुटती इच्छाओं का मार्मिक दस्तावेज़

पाकिस्तानी फिल्म जॉयलैंड पर लेखिका सुषमा गुप्ता की यह टिप्पणी केवल एक फिल्म समीक्षा नहीं, बल्कि उन अनकहे जीवन-संघर्षों की संवेदनशील पड़ताल है जो समाज, परंपरा और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच पिसते रहते हैं। सुषमा गुप्ता फिल्म के कथानक से आगे जाकर उसके स्त्री-विमर्श, लैंगिक पहचान, प्रेम, अकेलेपन और आत्म-अस्वीकृति के पक्षों को रेखांकित करती हैं। उनकी दृष्टि खास तौर पर उन पात्रों पर ठहरती है जिन्हें अक्सर मुख्य कथा के शोर में अनदेखा कर दिया जाता है।

सुषमा गुप्ता

पहली नज़र में ऐसा लगता है कि यह कहानी एक भोले-भाले से युवक की कहानी है, जो एक किन्नर के प्रेम में पड़ गया है। पर मेरे लिए यह कहानी उस युवक की नहीं है, चाहे सबसे ज़्यादा स्क्रीन स्पेस उसी के पास रहा है।

मेरे लिए यह कहानी उसकी उस चुलबुली-सी पत्नी की है, जिसने शादी इसलिए नहीं की कि किसी की पत्नी बनना था, बल्कि इसलिए की कि परंपरा है, सो कर ली। शादी बहुत हद तक समझौतों का नाम है, यह जानते हुए भी खुद का चुलबुलापन मार देना बहुत मुश्किल है। खुद को ऐसे रूटीन में ढाल देना, जिसमें खुद को कभी देखा ही नहीं, महसूस ही नहीं किया। जिसके पास अपने सपने हैं और उन सपनों के कद इतने छोटे हैं कि उनका पूरा न हो पाना वाकई इंसान का भीतर-भीतर पूरी तरह मर जाना होता है।

कुछ लोग मरी हुई ज़िंदगी स्वीकार लेते हैं और जीवन उसी में काट देते हैं। कुछ लोग नहीं कर पाते, तो नहीं ही कर पाते। हर बार, हर किसी के लिए मुमकिन नहीं होता कि वह कोई झाँसी की रानी का तमगा पहनकर एक तलवार उठा ले और सबसे लड़ता फिरे। सबकी अपनी सीरत है, अपनी फितरत है। पर जो नहीं लड़ा, उसे हारा हुआ ही माना जाए, यह भी गलत है… बहुत गलत… चाहे वह खुद से हारकर ज़िंदगी हार जाए।

आखिरी के सीन में जो इस प्यारी लड़की की जेठानी का भीतर तक का गुस्सा फूटता है, उसे ध्यान से देखिएगा। सबसे बड़ा स्त्री-विमर्श वही है।

हालाँकि इसमें एक और पक्ष भी बहुत मजबूती से दिखाया गया है। पर वह भी युवक का प्रेम नहीं है। वह है उस किन्नर का प्रेम, उसकी आँखें, उसका संघर्ष, उसका शोषण, कभी न भूलने वाली उसकी आँखों में डबडबाती पीड़ा, जिसको उसने आँखों में रोककर रखा और गिरने नहीं दिया।

आर्टिस्ट के साथ-साथ निर्देशक को भी सैल्यूट है कि इस तरह का काम निकलवा लेना कमाल है।

फिल्म की शूटिंग लाहौर में हुई है और जिन्होंने दिल्ली के चाँदनी चौक का इलाका देखा होगा, उन्हें लाहौर और चाँदनी चौक में बहुत फर्क नहीं लगेगा। भाषा उर्दू-पंजाबी मिक्स है, थोड़ी गूढ़ है, इसलिए कहीं-कहीं सबटाइटल का सहारा लेना पड़ता है। कुछ दृश्य इतने संवेदनशील हैं कि कील की तरह सीने में धँसते हैं।

जॉयलैंड कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर करने वाली पहली पाकिस्तानी फिल्म है और इसकी स्क्रीनिंग के बाद इसे स्टैंडिंग ओवेशन मिला। इसे जूरी पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ एलजीबीटीक्यू, क्वीर या नारीवादी थीम वाली फिल्म के लिए क्वीर पाम पुरस्कार भी मिला।

यह फिल्म 18 नवंबर 2022 को पाकिस्तान में रिलीज़ हुई थी। इसे 95वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के लिए पाकिस्तानी प्रविष्टि के रूप में चुना गया था। 21 दिसंबर 2022 को यह इस श्रेणी में शॉर्टलिस्ट होने वाली पहली पाकिस्तानी फिल्म बन गई।

बाकी सुना है कि इस फिल्म को पाकिस्तान में बैन कर दिया गया था।

इस फिल्म के बारे में एक जानकारी यह भी है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफज़ई, जो इसकी एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर भी हैं, इस बैन के खिलाफ सामने आईं और उन्होंने लिखा कि जॉयलैंड पाकिस्तान का एक प्रेम-पत्र है, जो वहाँ के खाने, पहनावे और संस्कृति को दुनिया के सामने रख रही है। यह दुखद है कि इसे पाकिस्तान में ही बैन कर दिया गया।

इस फिल्म को लेकर बहुत-सी खबरें हैं कि कुछ शर्तों के साथ बैन हटाया गया। इस मामले में मेरे पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि यह कितने सीन कट होने के बाद रिलीज़ हुई, हुई भी या नहीं हुई।

पर आप कहीं से ढूँढ़कर देख सकें तो देखिए। वाकई दिल को छू जाने वाली बहुत सुंदर फिल्म है।

फिल्म से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • जॉयलैंड पाकिस्तान की पहली फिल्म थी जिसका प्रीमियर प्रतिष्ठित Cannes Film Festival में हुआ।
  • यह सैम सादिक की पहली फीचर फिल्म थी।
  • फिल्म ने कान्स में Jury Prize (Un Certain Regard) जीता।
  • इसे Queer Palm Award भी मिला, जो LGBTQ+ विषयों पर बनी उत्कृष्ट फिल्मों को दिया जाता है।
  • फिल्म पाकिस्तान की ओर से 95वें अकादमी पुरस्कारों में आधिकारिक प्रविष्टि थी।
  • यह ऑस्कर की अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी की शॉर्टलिस्ट तक पहुँचने वाली पहली पाकिस्तानी फिल्म बनी।
  • फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर्स में Malala Yousafzai भी शामिल थीं।
  • पाकिस्तान में फिल्म की रिलीज़ को लेकर बड़ा विवाद हुआ और कुछ समय के लिए इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  • विरोध के बाद संशोधनों और क्षेत्रीय प्रतिबंधों के साथ इसकी रिलीज़ की अनुमति दी गई।
  • फिल्म का अधिकांश भाग लाहौर में फिल्माया गया है।
  • मुख्य पात्र बीबा का किरदार ट्रांस कलाकार अलीना खान ने निभाया, जिन्हें इस भूमिका के लिए व्यापक प्रशंसा मिली।
  • फिल्म को अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों ने 2022 की सबसे महत्वपूर्ण दक्षिण एशियाई फिल्मों में से एक माना।
  • जॉयलैंड ने पाकिस्तानी सिनेमा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुषमा गुप्ता समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय लेखिका हैं, जो कहानी, उपन्यास और कविता के माध्यम से मानवीय संबंधों, मध्यवर्गीय जीवन और स्त्री अनुभवों की सूक्ष्म परतों को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में तुम्हारी पीठ पर लिखा मेरा नाम, मन विचित्र बुद्धि चरित्र, कितराह और तलब उल्लेखनीय हैं, जिनका प्रकाशन हिंद युग्म से हुआ है। उनकी रचनाओं में जीवन के साधारण अनुभवों को संवेदनशील और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत करने की विशेषता दिखाई देती है, जिसके कारण उनका लेखन पाठकों से गहरा संवाद स्थापित करता है।

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